
बीकानेर नगर निगम चुनाव में टिकट पर घमासान: भाजपा-कांग्रेस दोनों में बगावत की आंधी, क्या निर्दलीयों के हाथ होगी बोर्ड की चाबी?
बीकानेर नगर निगम चुनाव में टिकट पर घमासान: भाजपा-कांग्रेस दोनों में बगावत की आंधी, क्या निर्दलीयों के हाथ होगी बोर्ड की चाबी?
बीकानेर, @MaruSangram। नगर निगम चुनाव 2026 के लिए टिकट वितरण पूरी तरह फाइनल होने से पहले ही बीकानेर की सियासत में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों में टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है। सामान्य वर्ग की सीटों पर दूसरे वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट देने, वार्ड से बाहर के चेहरों को मैदान में उतारने और संगठन में प्रभावशाली पदों पर बैठे नेताओं द्वारा खुद या अपने करीबियों के लिए टिकट मांगने जैसे आरोपों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है।
टिकट वितरण के बीच अलग-अलग वार्डों से विरोध और नाराजगी की तस्वीरें सामने आ रही हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार बीकानेर नगर निगम में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार सत्ता के समीकरण तय करेंगे?
वार्ड 38 में टायर जलाकर विरोध
वार्ड 38 में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर ओबीसी चेहरे अशोक प्रजापत को भाजपा का टिकट दिए जाने की चर्चा के बाद विरोध की खबर सामने आई। सामान्य वर्ग के भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाजार में टायर जलाकर कथित तौर पर अपना विरोध दर्ज कराया।
इस घटनाक्रम ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को सामने ला दिया है।
वार्ड 29 में वोटों को लेकर आरोप
वार्ड 29 में भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिलाध्यक्ष राजाराम बिश्नोई ने टिकट वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि वार्ड में बिश्नोई समाज के 800 से अधिक वोट हैं, जबकि इनकी संख्या करीब 200 बताकर टिकट की दावेदारी को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इन आरोपों को लेकर पार्टी के अंदर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा में परिवारवाद के आरोप
भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर परिवारवाद के आरोप भी सामने आ रहे हैं। आरोप है कि जिन नेताओं पर पूरे शहर में योग्य कार्यकर्ताओं को टिकट दिलाने की जिम्मेदारी है, उन्हीं से जुड़े लोगों द्वारा खुद के अलावा अपने ड्राइवर और बहन के लिए भी टिकट की दावेदारी की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस में भी टिकट को लेकर असंतोष
भाजपा के साथ कांग्रेस में भी टिकट वितरण को लेकर नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। कांग्रेस की 36 नामों की कथित लीक संभावित सूची सामने आने के बाद कई वार्डों में पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष की चर्चा है।
सिंबल वितरण से पहले नाराज नेताओं और संभावित बागियों को मनाना कांग्रेस संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी बनी चुनौती
दोनों प्रमुख दलों में टिकट वितरण को लेकर उठ रहे विरोध के बीच सबसे बड़ा सवाल जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर है। वार्ड स्तर पर सामने आ रहे विरोध प्रदर्शन संकेत दे रहे हैं कि टिकट का फैसला कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।
यदि नाराज दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो भाजपा और कांग्रेस दोनों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती बढ़ सकती है।
क्या निर्दलीयों के हाथ होगी बोर्ड की चाबी?
नगर निगम चुनाव में मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रह सकता। यदि दोनों दलों से बड़ी संख्या में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरते हैं और जीत दर्ज करते हैं, तो बोर्ड बनाने के लिए बहुमत जुटाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसे में निर्दलीय और बागी प्रत्याशी नगर निगम बोर्ड के गठन में किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। हालांकि, चुनाव परिणाम आने से पहले यह कहना जल्दबाजी होगी कि कोई भी दल अपने दम पर बोर्ड नहीं बना पाएगा।
अब सबकी नजर टिकट की अंतिम सूची, सिंबल वितरण और इसके बाद सामने आने वाले बागियों पर टिकी है। यही तस्वीर बीकानेर नगर निगम चुनाव के वास्तविक राजनीतिक समीकरण को काफी हद तक स्पष्ट करेगी।
Author: Sarjit Singh







