February 27, 2026 6:18 pm

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया पेश, इससे पहले भी हुआ है पेश, पढ़ें पुरी खबर….

Sarjit Singh

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महिला आरक्षण बिल लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया पेश, इससे पहले भी हुआ है पेश, पढ़ें पुरी खबर….

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक

लोकसभा में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल” पेश

◆ लोकसभा में महिलाओं के लिए 181 सीटें रिज़र्व होंगी

◆ 15 साल तक लागू रहेगा महिला आरक्षण

◆ 15 साल बाद पुनर्विचार करेगी संसद

दिल्ली, @MaruSangram। महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पेश कर दिया गया है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बिल को संसद में पेश किया।

बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने सभी दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की थी। केंद्रीय मंत्री ने जब यह बिल पेश किया तो संसद में जोरदार हंगामा हुआ।

महिला आरक्षण बिल के तहत विधानसभा की 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा लोकसभा में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा। यानी 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। साथ ही दिल्ली विधानसभा में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा।

वही संसद ने बोलते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हिन्दुत्व की चर्चा तो होती है, क्या हम ‘हिन्दीत्व’ पर आ जाएंगे?’ उनके भाषण के दौरान बाद में हंगामा भी होता हुआ दिखा।

दरअसल, स्पीकर ओम बिड़ला सहित कई सदस्य उनके बैठ जाने की मांग कर रहे थे, लेकिन अधीर रंजन चौधरी ने अपनी बात रखनी जारी रखी. इस दौरान ही सदन में जमकर नारेबाजी होने लगी।

इस दौरान स्पीकर ओम बिड़ला अधीर रंजन को अपनी बात खत्न करने के लिए कहते रहे। ओम बिड़ला ने कहा कि आज का दिन महिला आरक्षण के लिए है। इसलिए बाकी बातें बाद में रखिएगा।

यह भी का की बात

कब-कब सदन में रोका गया बिल
1996 में पटल पर रखे जाने से लेकर साल 2010 में राज्यसभा से पास होने तक महिला आरक्षण विधेयक कई बार सदन से ठुकराया गया। इसका सिलसिला 12 सितंबर 1996 से शुरू होता है। बिल को पटल पर रखा गया, विरोध के कारण पास नहीं हो सका, फिर बिल को वाजपेयी सरकार में पटल पर लाया गया था, लेकिन उस साल भी बात नहीं बनी।

इसी तरह 1999, 2003, 2004 और 2009 में बिल के पक्ष में माहौल नहीं बन सका, लिहाजा ये विधेयक पास नहीं हो सका।

12 सितंबर 1996- महिला आरक्षण विधेयक को पहली बार एचडी देवगौड़ा सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में पेश किया। इसके बाद ही देवगौड़ा सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा को भंग कर दिया गया। विधेयक को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। इस समिति ने नौ दिसंबर 1996 को लोकसभा को अपनी रिपोर्ट पेश की।

26 जून 1998- अटल बिहारी वाजयेपी के नेतृत्व वाली NDA की सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया, लेकिन पास नहीं हो सका। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली NDA सरकार अल्पमत में आ जाने से गिर गई और 12वीं लोकसभा भंग हो गई।

22 नवम्बर 1999-  एक बार फिर से सत्ता में लौटी NDA सरकार ने 13वीं लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को फिर से पेश किया, लेकिन इस बार भी सरकार इस पर सभी को सहमत नहीं कर सकी।
 
साल 2002 और 2003-  बीजेपी नेतृत्व वाली NDA सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, लेकिन कांग्रेस और वामदलों के समर्थन के आश्वासन के बावजूद सरकार इस विधेयक को पारित नहीं करा सकी।

मई 2004- कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के इरादे का ऐलान किया।

6 मई 2008- महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पेश हुआ और उसे कानून एवं न्याय से संबंधित स्थायी समिति के पास भेजा गया। 

17 दिसंबर 2009- स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की और समाजवादी पार्टी, जेडीयू तथा आरजेडी के विरोध के बीच महिला आरक्षण विधेयक को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा गया। 

22 फरवरी 2010- तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद में अपने अभिभाषण में कहा था कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

25 फरवरी 2010- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण विधेयक का अनुमोदन दिया।

08 मार्च 2010- महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा के पटल पर रखा गया, लेकिन सदन में हंगामे और एसपी और राजद द्वारा UPA से समर्थन वापस लेने की धमकी की वजह से उस पर मतदान नहीं हो सका।

09 मार्च 2010- कांग्रेस ने बीजेपी, जेडीयू और वामपंथी दलों के सहारे राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक भारी बहुमत से पारित कराया।

राज्यसभा ने 9 मार्च, 2010 को महिला आरक्षण विधेयक पारित किया था, हालांकि लोकसभा में कभी भी विधेयक पास नहीं हो सका लिहाजा इस विधेयक को समाप्त कर दिया गया। यह अभी तक लोकसभा में लंबित रहा तो अब इसे फिर से पारित कराने की प्रक्रिया करनी होगी।

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Author: Sarjit Singh

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