

बहादुर को सलाम
बहादुर को सलाम: 500 से ज्यादा लोगों की जा सकती थी जान: अवैध गैस गोदाम से जली बिल्डिंग, आग बुझाते पैरों में पड़े छाले….
अजमेर, @MaruSangram। अजमेर में लक्ष्मी मार्केट की 3 मंजिला बिल्डिंग दो दिन तक आग का गोला बनी रही। 32 घंटे तक बिल्डिंग भट्ठी की तरह तपी। फायर ब्रिगेड टीम आग बुझाने अंदर गई तो सिर पर गर्म पानी गिरने लगा। पैरों में फफोले पड़ गए। धुएं से आंखों में जलन होने लगी। इसके बाद भी टीम डटी रही और आग पर काबू पाया।
आगजनी में बिल्डिंग सहित उसमें बनी दुकानों का सारा सामान जलकर राख हो गया। 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ लेकिन ये आग बड़ी तबाही का कारण बन सकती थी। आग सुबह 9 बजे लगी और 10 बजे से दुकानें खुलने लगती हैं। ऐसे में 200 दुकानों के दुकानदार और उसमें काम करने वाले लोग पहुंचने लगते हैं। आग लगने और दुकानें खुलने में केवल एक घंटे का अंतर था। गनीमत रही कि आग के समय बिल्डिंग के अंदर कोई नहीं था।
रेलवे स्टेशन के सामने है बाजार
रेलवे स्टेशन के सामने विमला मार्केट है। ये दवाइयों का बड़ा बाजार है। ये बाजार तंग गलियों में है। दुकानों की दीवारें भी आपस में सटी हैं। दवा विक्रेता संघ के सम्भागीय अध्यक्ष श्याम नागरानी ने बताया कि इस बाजार में कुल 200 के करीब दुकानें है। 200 दुकानों में करीब 500 दुकानदार व उसमें काम करने वाला स्टाफ है। विमला मार्केट के अंदर लक्ष्मी मार्केट की तीन मंजिला बिल्डिंग है। इस बिल्डिंग में शुक्रवार सुबह 9 बजे एसी में शॉर्ट सर्किट के बाद आग लग गई थी,लेकिन इस हादसे में लापरवाही को भी नकारा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि गैस का गोदाम होना गलत है। यह हार्ट ऑफ सिटी है और ऐसे में ऐसी रिस्क होना सही नहीं है। प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां होलसेल की दुकानें हैं और आग लगने से दवा सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
बिल्डिंग में शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगी थी। ऐरा में गोदाम और बाहर की तरफ लगा एसी, जिससे आग फैली।
बिल्डिंग में शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगी थी। ऐरा में गोदाम और बाहर की तरफ लगा एसी, जिससे आग फैली।
अवैध रूप से चल रहा था गोदाम
500 वर्ग गज में बनी ये बिल्डिंग 30 साल पुरानी है, जिसके मालिक तीन भाई जयकिशन, प्रकाश और विनोद साधवानी हैं। तीन मंजिला इस बिल्डिंग से जयकिशन साधवानी गैस और प्रकाश व विनोद कपडे़ का कारोबार करते हैं। बिल्डिंग में गैस गोदाम अवैध रूप से चल रहा था, जिसकी एनओसी नहीं ली गई थी।
चारों तरफ से पैक है बिल्डिंग, केवल एक एग्जिट पाइंट
तीन मंजिला बिल्डिंग में एक बेसमेंट है, जिसमें करीब 2 करोड़ रुपए का अंडरगारमेंटस था। ग्रांउड फ्लोर में कूलिंग गैस का गोदाम बना हुआ था। गोदाम के बगल में मेडिकल स्टोर और पीछे की तरफ चश्मे-बेल्ट, कपड़े सहित अलग-अलग सामान की 12 दुकान थी। सेकंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल बना था, जिसमें कपड़ों का स्टॉक था। इसके अलावा मालिक का ऑफिस था। थर्ड फ्लोर पर भी कपड़े का सामान हॉल में रखा था। बिल्डिंग में केवल एक एग्जिट पाइंट है। चारों तरफ कोई खिड़की नहीं है। आस-पास भी दुकानें बनी हुई हैं। बिल्डिंग के बगल में एक घर है, जिसमें दरार आ गई है। ऐसे में आग बुझाने और धुआं निकालने में काफी मुश्किल हुई।
आग ग्राउंड फ्लोर से फैलते हुए बेसमेंट और ऊपरी मंजिल तक पहुंचकर पूरी बिल्डिंग को चपेट में ले लिया था।
आग ग्राउंड फ्लोर से फैलते हुए बेसमेंट और ऊपरी मंजिल तक पहुंचकर पूरी बिल्डिंग को चपेट में ले लिया था।
आग बुझाने के दौरान भी फटते रहे सिलेंडर
आग लगने की सूचना पर सिविल डिफेंस, अग्निशमन, नगर निगम, अजमेर डिस्कॉम, पुलिस व प्रशासन के 500 से ज्यादा कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आग को बुझाने के लिए लगातार काम किया गया। कलेक्टर-एसपी भी देर रात तक मौके पर रहे। सुबह फायर बिग्रेड की गाड़ियों को मौके पर सीधे लाने के लिए रेलवे स्टेशन के पास खाली प्लॉट की दीवार को तोड़कर रास्ता बनवाया गया था। गाड़ियों ने दो दिन में करीब 400 से ज्यादा फेरे लगाए। आग बुझाने के दौरान भी सिलेंडर लगातार फटते रहे। एक सिलेंडर फटकर सामने वाली दुकान के शटर पर जाकर गिरा।
बिल्डिंग मालिक प्रकाश साधवानी पुलिस को जानकारी देते हुए। उनका भाई जयकिशन ही गोदाम चला रहा था।
बिल्डिंग मालिक प्रकाश साधवानी पुलिस को जानकारी देते हुए। उनका भाई जयकिशन ही गोदाम चला रहा था।
धुएं के गुबार में आग का नहीं लगा अनुमान
आग बुझाने वाली टीम में शामिल अग्निशमन कार्मिक मुकेश चौधरी ने बताया कि आग फैलने से पूरी बिल्डिंग भट्ठी की तरह तप रही थी। धुएं के बीच लगातार ब्लास्ट हो रहा था। आगे के हिस्से की आग को बुझाया गया लेकिन धुएं के कारण सामने कुछ नजर नहीं आ रहा था। बिल्डिंग के अंदर धुएं का गुबार उठ गया था। खिड़की या कोई गेट नहीं होने से धुआं निकालने में परेशानी हुई। ऐसे में पता भी नहीं चल रहा था कि बिल्डिंग के किस हिस्से तक आग फैली है और
कितनी लगी है। ऐसे में पड़ोस की छत पर जाकर बिल्डिंग की दीवारों में छेद किया गया था ताकि धुआं निकल सके। बाहर से पानी की बौछार कर रहे थे।
धुएं से सांस लेने में हुई तकलीफ
चौधरी ने बताया कि सुबह से शाम हो गई थी, सिलेंडर फटते जा रहे थे। ऐसे में बिल्डिंग के अंदर जाने में खतरा था। धीरे-धीरे छोटे सिलेंडरों को बाहर निकाला गया। गोदाम का शटर तोड़कर धुआं निकाला गया। क्रेन में चढ़कर पहली मंजिल के आगे के हिस्से को तोड़ा गया। टीम के दो लोगों ने अंदर जाने की कोशिश की लेकिन धुएं के कारण अंदर नहीं जा पाए। वे वापस नीचे आ गए। धुएं से सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। ऐसे में ब्रीदिंग एप्रेटस सेट मंगवाए गए।
पैरों में पड़े छाले
देर शाम करीब 6 बजे टीम गोदाम के रास्ते से आगे बढ़ी। आगे की दीवारें ब्लास्ट में टूट चुकी थी। बाहर से छोड़ा जा रहा पानी भी गर्म हो गया था। हमारे सिर के ऊपर गर्म पानी गिर रहा था।
हालांकि बचाव के लिए हेलमेट पहना हुआ था। धीरे-धीरे आगे बढ़े लेकिन धुआं आंखों में लगने से जलन होने लगी। तपन से शरीर जल रहा था। पैरों में छाले पड़ गए थे। अंदर जाकर आग की स्थिति का पता चला।
पड़ोसी परिवार अब भी डरा-सहमा
बिल्डिंग के बगल में एक मकान में राजेश जैन का परिवार रहता है। सबसे पहले आग की जानकारी उन्हें ही लगी थी। हादसे के बाद से पूरा परिवार डरा-सहमा हुआ है। उनके मकान में दरार आ गई। उनकी पत्नी मधु जैन ने बताया कि शुक्रवार सुबह धमाके की आवाज आई थी। हमें लगा बाहर कोई सामान गिरा है। बाहर आकर देखा तो आग की लपटें दिखी। देखते ही देखते धमाके होने लगे। इसकी सूचना बिल्डिंग मालिक को दी। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और फायर बिग्रेड की टीम पहुंची।
मालिक ने गोदाम के अंदर 12 बड़े सिलेंडर होने की बात कही, लेकिन मौके पर बड़े सिलेंडरों की संख्या अधिक थी।
गैस गोदाम मालिक की लापरवाही आई सामने
बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर जयकिशन साधवानी गोदाम से फ्रिज, एसी में कूलिंग गैस भरने का काम करते थे। ये काम वे करीब 30 साल से कर रहे हैं। ऐसे में गोदाम में 12 बडे़ सिलेंडर सहित छोटे सिलेंडर रखे हुए थे लेकिन मालिक ने इसके लिए एनओसी नहीं ले रखी थी। ऐसे में नियम विरूद्ध काम चल रहा था।
गोदाम में 12 बडे़ सिलेंडर और 200 छोटी लोहे की केन
गैस गोदाम के मालिक जयकिशन साधवानी ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर गोदाम के पीछे की तरफ 12 दुकान थी। बेल्ट-चश्मे की दुकान के बाहर एसी का आउटर लगा था।
दुकानदार एसी चालू छोड़ गया, जिसमें शॉर्ट सर्किट से AC के गोदाम में आग लग गई। गोदाम में 12 बडे़ सिलेंडर और 200 छोटी लोहे की केन आधे किलो व एक किलो की थी, जिसकी कीमत करीब तीन लाख रुपए थी। छोटे केन ब्लास्ट होने पर बेसमेंट तक आग फैल गई। बेसमेंट में करीब 2 करोड़ रुपए का होजरी का माल पड़ा था, जो जल गया। पड़ोसियों की सूचना पर मौके पर पहुंचे छह बडे़ सिलेंडर को बाहर निकाल लिया गया था। छोटे केन अंदर ही थे, जो लगातार ब्लास्ट हुए।
गोदाम मालिक ने बताया कि सिलेंडर में R1-134 गैस भरी हुई थी। यह ठंडी गैस है और कूलिंग के लिए एसी व फ्रिज में काम आती है। इसके लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। वे पिछले 60 साल से ये काम कर रहे हैं। आग बुझाने के उपकरण भी थे लेकिन वहां कोई नहीं था। ऐसे में आग फैल गई और अंदर नहीं जा सकें। भवन की फायर एनओसी वर्तमान में नहीं है। जब भवन का निर्माण किया था, तब फायर एनओसी ली थी।
मालिक के पास नहीं है फायर एनओसी
फायर ऑफिसर गौरव तंवर ने बताया कि किसी भी व्यवसायिक गतिविधि के लिए फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। गैस गोदाम का संचालन किया जा रहा था लेकिन एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया और न ही कोई एनओसी ली गई।
शहर के अधिकांश भवनों में फायर एनओसी नहीं ली गई है। इसके लिए करीब डेढ़ सौ भवन मालिकों को नोटिस दिया गया है। एनओसी नहीं लेने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
शहर में ज्वलनशील चीजों के 65 जगह गोदाम
शहर के मदार गेट, केसरगंज, भूगल गली, कवंडसपुरा, पड़ाव, प्लाजा रोड, ब्लू केसल, डिग्गी बाजार, पुरानी मंडी, मूंदड़ी मोहल्ला, खारी कुई, घसेटी बाजार, सौदागर मोहल्ला, चूड़ी बाजार, पन्नीगरान चौक क्षेत्र में 65 से ज्यादा बिल्डिंग और गोदाम हैं, जिसमें ज्वनशील पदार्थ रखे जा रहे हैं। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रशासन की लापरवाही भी आई सामने
अग्निशमन विभाग की ओर से शहर में फायर एनओसी को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पिछले दिनों अग्निशमन विभाग की टीम ने डेढ़ सौ से अधिक लोगों को नोटिस दिए लेकिन कार्रवाई नहीं की।
शहर के कई मॉल, कॉम्प्लेक्स व दुकानों में फायर एनओसी छोड़ फायर फाइटिंग सिस्टम तक नहीं है।
हादसों से भी नहीं लिया सबक
डिग्गी बाजार, घसेटी बाजार, खारी कुई, पुरानी मंडी, दरगाह बाजार, धान मंडी, लाखन कोटड़ी, नया बाजार में कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। आग लगने के बाद ही कार्रवाई होती है। इसके बाद सब ठंडे बस्ते में चला जाता है। ऐसे में लापरवाही से लगातार आगजनी की घटना हो रही है।
प्रशासन के पास पर्याप्त उपकरण नहीं
आग बुझाने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त उपकरण भी नहीं थे। धुंए के कारण अंदर जाने में भी काफी टाइम लग गया। इसके लिए कोई इंतजाम भी नहीं था। ऐसे में भवन के हिस्से को तोड़कर धुआं निकाला और फिर बिल्डिंग के अंदर गए।
बिल्डिंग के अंदर दुकानदारों के वाहन भी खड़े थे। धुआं कम होने पर शुक्रवार शाम को वाहनों को बाहर निकाला गया था।
बिल्डिंग के अंदर दुकानदारों के वाहन भी खड़े थे। धुआं कम होने पर शुक्रवार शाम को वाहनों को बाहर निकाला गया था।
एनओसी के नियम
आग लगने पर सुरक्षा इंतजाम होना जरूरी
भवन मालिक को एनओसी लेने से पहले आग से सुरक्षा के इंतजामों का ब्यौरा देना होता है। इसमें कई बिंदु होते हैं।
प्रमुख रूप से इंटरनल हाईड्रेंट हैं या नहीं, पानी की उपलब्धता है या नहीं, ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन, बेसमेंट में कार पार्किंग ब्रांड पाइप, प्रत्येक फ्लोर में इन्टरकॉम सिस्टम है या नहीं, सीढ़ियां एवं लिफ्ट की संख्या, आमजन को सूचना देने की व्यवस्था, फायर अधिकारी के नम्बर और भवन में आपातकालीन व्यवस्थाओं की स्थिति आदि बताना होता है। इसके बाद नगर निगम के अग्निशमन विभाग की टीम मौका निरीक्षण करती है।
निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद एनओसी मिलती है। अजमेर में कईं ऐसे भी है, जिन्होंने फायर एनओसी ले तो ली लेकिन उसका नवीनीकरण नहीं कराया है।
Author: Sarjit Singh







