April 25, 2026 9:14 am

मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ की 126वीं जयंती के अवसर पर राजस्थानी रसधार का आयोजन…..

Sarjit Singh

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मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ की 126वीं जयंती के अवसर पर

मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ की 126वीं जयंती के अवसर पर राजस्थानी रसधार का आयोजन…..

बीकानेर, @MaruSangram। आधुनिक राजस्थानी कहनी के अग्रणीय कथाकार मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ की 126वीं जयंती के अवसर पर मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ स्मृति संस्थान की ओर से राजस्थानी रसधार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता अपना वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि जो लोग कहते है राजस्थानी मान्यता की लड़ाई आजादी के बाद की है तो उन्हें मुरलीघर की के बारे में जानना चाहिए।

आजादी से 17 साल पहले ही मुरलीधर की ने केवल राजस्थानी में ही लिखने और बोलने का प्रण लें लिया था।

उन्होंने आगे कहा की हमे व्यास जी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए उन्होंने राजस्थानी में रोज लिखने और बोलने का जो प्रण लिया उसे अपनी अंतिम सांस तक निभाया। इसके साथ ही शर्मा ने कहा की अब राजस्थानी मान्यता आंदोलन को गति देनी होगी जिसका एक ही मंत्र हैं ‘एको, चेतो अर खुड़को करो’।

कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत स्वागत करते हुवे मूलीधर व्यास स्मृति संस्थान के अध्यक्ष श्रीनाथ व्यास ने व्यास जी के व्यक्तिव पर बात करते हुए कहा कि वो बहुत सहज और सरल व्यक्ति थे उनके जीवन में राजस्थानी से ऊपर कुछ नहीं था।

समाज में जितनी कुरीतियां थी उन्होंने उन सब पर खुल कर बात की और उन्हें दूर करने की शुरुवात घर से की।

राजस्थानी के लोकप्रिय गीतकार शंकर सिंह राजपुरोहित ने अपना गीत करलो दुनिया मुठ्ठी में ओ बेचणीया रो दावों है प्रस्तुत किया।

राजस्थानी के चर्चित गीतकार छैलू चारण छैल ने

कलम कोरणी सोहणी, थळवट रो उजियास|
सकल विधावां में लिख्यो, वाह मुरलीधर व्यास||
अबखायां सूं ओ लड़्यो, हाजिर हो हरमेश|
पीढ्यां री पत राखतो, मुरधरियो||

योगेश ने दोहे के माध्यम से मुरलीधर व्यास राजस्थानी को नमन किया साथ ही अपना गीत मुंडे रे तालों जाडियोडो कुण खुलवावे जी से खूब तालियां बटोरी।

युवा गीतकार विप्लव व्यास ने अपना राजस्थानी गीत रई पीड़ री पीड़ प्रस्तुत किया इसके साथ ही युवा गीतकार आनंद मस्ताना ने अपने राजस्थानी गीत आओ नी आओं नी म्हारा गिरधारी और देखौनी देखौनी म्हारे देस ने सुनाकर खूब वाह वाह लूटी।

मुरलीधर व्यास के पादपोत्र और कार्यक्रम संयोजक योगेश राजस्थानी ने कहा कि मुरलीधर जी ने कहानी, रेखाचित्र, निबंध, तो लिखे ही उसके साथ ही उन्होंने राजस्थानी कहावतों और राजस्थानी लोक गीतों का संपादन भी किया जो आज राजस्थानी साहित्यकारों के लिए माइल स्टोन है।

उन्होंने गद्य के साथ साथ दोहे सोरठे भी खूब लिखे है। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि शशांक शेखर जोशी ने किया।

कार्यक्रम में शायर इरशाद अजीज, संजय पुरोहित, डॉ. अजय जोशी, राजाराम स्वर्णकार, राजेन्द्र जोशी, क़ासिम बीकानेरी, प्रशांत जैन, गौरीशंकर प्रजापत, गिरिराज पारीक आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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Author: Sarjit Singh

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