

आयुर्वेद कि सटीक रोग निदान विद्या “नाड़ी परीक्षण” का 400 चिकित्सकों को दिया सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण….
आयुर्वेद कि सटीक रोग निदान विद्या “नाड़ी परीक्षण” का 400 चिकित्सकों को दिया सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण…..
राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रोफेसर विनायक तायड़े ने आयुर्वेद कि सटीक रोग निदान विद्या “नाड़ी परीक्षण” का 400 चिकित्सकों को दिया सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष् में विश्व आयुर्वेद परिषद् चिकित्सक प्रकोष्ठ जयपुर प्रांत की ओर से राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला का हो रहा आयोजन
आयुष मंत्रालय में आयुर्वेद का बजट हो सर्वाधिक, क्योंकि आयुर्वेद समग्र, स्वदेशी, सर्वग्राही, प्रामाणिक, प्रभावी, जनलोकप्रिय चिकित्सा पद्धति है। -प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति (निदेशक, आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद दिल्ली)
विश्व आयुर्वेद परिषद राजस्थान, चिकित्सक प्रकोष्ठ, जयपुर प्रांत के द्वारा आज से दो दिवसीय “नाड़ी विज्ञान एवं विद्धकर्म चिकित्सा” राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला एवं आरोग्य प्रदर्शनी का आयोजन श्रीद्वारकेश भवन, खाटूश्यामजी, सीकर में आज से शुरू हुआ।
कार्यशाला का सुप्रारंभ मुख्य अतिथि
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति , कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे।
विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ला तथा कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथिगण श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह चौहान, बोर्ड आफ इंडियन मेडिसिन राजस्थान के रजिस्ट्रार डाॅ. सीताराम शर्मा, राजेंद्र शर्मा, धर्मगुरु जयपुर महानगर सेवा प्रमुख राष्ट्रीय स्वयं सेवक , प्रोफेसर विनायक तायड़े, राष्ट्रीय नाड़ी रोग विशेषज्ञ, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय सीकर के प्राचार्य महेन्द्र कुमार सौरठा, विश्व आयुर्वेद परिषद राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. राकेश कुमार शर्मा, कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष एवं विश्व आयुर्वेद परिषद चिकित्सक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी डॉ. पवन सिंह शेखावत ने भगवान धन्वंतरि प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन संगठन महासचिव डॉ विनोद कुमार गौतम ने किया।
कार्यकम के प्रारंभ में संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने सभी अतिथिगणों एवं आगंतुक प्रतिभागियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। संगठन के चिकित्सक प्रकोष्ठ प्रदेश प्रभारी डॉ. पवन सिंह शेखावत ने संगठन का परिचय एवं उद्देश्य की जानकारी सभी के समक्ष रखी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि आयुर्वेद सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है और न केवल चिकित्सा पद्धति बल्कि सम्पूर्ण जीवन विज्ञान है।
आयुर्वेद वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति नहीं, स्वस्थ दीर्घायु जीवन के लिए अनिवार्य चिकित्सा पद्धति है, वर्तमान समय में पुनः स्वस्थ दीर्घायु की चाह, आमजन को आयुर्वेद की ओर आकर्षित कर रहा है। आयुर्वेद चिकित्सा के प्रमुख सिद्धांत दोष दुष्य को आधार बनाकर चिकित्सा करने पर शत प्रतिशत पूर्ण फलदाई होती है।
कार्यक्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला ने कहा कि विश्व आयुर्वेद परिषद विगत 25 वर्षों से भी अधिक समय से आयुर्वेद के पुनरुत्थान के लिए पूर्ण सक्रियता के साथ कार्य करते हुए वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद के प्रचार प्रसार, आयुर्वेद चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों के कौशल विकास का कार्य निरंतर कर रहा है।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य डाॅ. विनायक तायड़े ने देशभर से पधारे सैंकड़ों आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ी परीक्षण का सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।
रींगस रोड़ स्थित द्वारकेश भवन में आमजन के लिए आरोग्य प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आयुर्वेद की प्रमुख फार्मा कंपनियों ने अपने विभिन्न उत्पादों की स्टॉल लगाई।
संगठन के आयोजन अध्यक्ष पवन सिंह शेखावत ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला में देशभर के 400 आयुर्वेद चिकित्सकों को नाड़ी विज्ञान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विश्व आयुर्वेद परिषद राजस्थान द्वारा पूर्व में भी अग्निकर्म, पंचकर्म, मर्म-चिकित्सा इत्यादि आयुर्वेद की प्रमुख विधाओं पर कार्यशाला आयोजित की जा चुकी हैं।
आयुर्वेद की प्राचीन लुप्त हो रही महत्वपूर्ण विधाओं को पुन: स्थापित करने के लिए विश्व आयुर्वेद परिषद पिछले 27 वर्ष से प्रयासरत हैं।
आयोजन सचिव डॉ. महेश इंद्रा ने बताया कि आयुष मंत्रालय (भारत सरकार) के नेशनल कमिशन फाॅर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) द्वारा इस कार्यशाला को 10 क्रेडिट पॉइंट देनें की स्वीकृति दी गई है।
आयुष मंत्रालय के बोर्ड ऑफ इथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन के ऑब्जर्वर इस कार्यक्रम की मोनिटरिंग कर रहे है।
आयोजन सहसचिव डाॅ. बी एल बराला, संयुक्त सचिव डाॅ. रामावतार शर्मा, सीकर विभाग संयोजक डाॅ. जितेंद्र कुमार वर्मा, जिला संयोजक डाॅ. हरिराम कटारिया, डाॅ. शंकरलाल शर्मा, डाॅ. रमेश कस्वा सहित 40 से अधिक आयोजन समिति के सदस्य इस ऐतिहासिक कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग कर रहे है।
400 doctors were given theoretical and practical training in Ayurveda’s accurate disease diagnosis technique “Nadi Pariksha”….
400 doctors were given theoretical and practical training in Ayurveda’s accurate disease diagnosis technique “Nadi Pariksha”….
Nationally renowned Professor Vinayak Tayde gave theoretical and practical training in Ayurveda’s accurate disease diagnosis technique “Nadi Pariksha”.
On the occasion of National Ayurveda Day, Vishwa Ayurveda Parishad, Physician Cell, Jaipur Province is organizing a National Ayurveda Workshop.
Ayurveda should have the highest budget in the Ministry of AYUSH, because Ayurveda is a holistic, indigenous, all-inclusive, authentic, effective, popular medical system. -Professor Pradeep Kumar Prajapati (Director, All India Institute of Ayurveda Delhi)
World Ayurveda Parishad Rajasthan, Physician Cell, Jaipur Province started organizing a two-day “Nadi Vigyan and Vidhkarma Chikitsa” National Ayurveda Workshop and Health Exhibition from today at Shri Dwarkaesh Bhawan, Khatushyamji, Sikar.
The workshop was inaugurated by the Chief Guest, Director of All India Ayurveda Institute, New Delhi, Professor Pradeep Kumar Prajapati, who was presiding over the program.
National President of Vishwa Ayurveda Parishad, Professor Govind Sahay Shukla and special guests of the program, Shyam Mandir Committee President Prithvi Singh Chauhan, Registrar of Board of Indian Medicine, Rajasthan, Dr. Sitaram Sharma, Rajendra Sharma, Religious Leader, Jaipur Metropolitan Service Chief Rashtriya Swayamsevak, Professor Vinayak Tayade, National Pulse Specialist, Principal of Government Ayurveda College, Sikar, Mahendra Kumar Sorath, State President of Vishwa Ayurveda Parishad, Rajasthan, Dr. Rakesh Kumar Sharma, Organizing President of the program and State In-charge of Vishwa Ayurveda Parishad Doctors Cell, Dr. Pawan Singh Shekhawat, by lighting a lamp in front of Lord Dhanvantari statue. The program was conducted by Organization General Secretary, Dr. Vinod Kumar Gautam.
At the beginning of the program, State President of the organization, Dr. Rakesh Kumar Sharma expressed his heartfelt gratitude to all the guests and visiting participants. The state in-charge of the medical cell of the organization, Dr. Pawan Singh Shekhawat, presented the introduction and objective of the organization to everyone.
While addressing the program, the chief guest of the program, Professor Pradeep Kumar Prajapati, Director of All India Institute of Ayurveda, said that Ayurveda is a complete medical system and not only a medical system but a complete science of life.
Ayurveda is not an alternative medical system, it is an essential medical system for a healthy and long life. In the present times, the desire for a healthy and long life is again attracting the common people towards Ayurveda. The treatment is 100% fruitful if done on the basis of the main principle of Ayurveda medicine, Dosha Dusya.
The national president of the program, Dr. Govind Sahay Shukla said that Vishwa Ayurveda Parishad has been working actively for the revival of Ayurveda for more than 25 years and is continuously promoting Ayurveda at the global level, and developing the skills of Ayurveda doctors and students.
In the program, Maharashtra’s famous Nadi Vaidya Dr. Vinayak Tayde gave theoretical and practical training of pulse testing to hundreds of Ayurveda doctors from across the country.
A health exhibition was also organized for the general public at Dwarkaesh Bhawan on Ringas Road, in which major Ayurveda pharma companies set up stalls of their various products.
The organizing president of the organization, Pawan Singh Shekhawat, said that 400 Ayurveda doctors from across the country are being trained in pulse science in the National Ayurveda Workshop.
Vishwa Ayurveda Parishad Rajasthan has previously organized workshops on major methods of Ayurveda such as Agnikarma, Panchkarma, Marma-Chikitsa etc.
Vishwa Ayurveda Parishad has been trying for the last 27 years to re-establish the ancient and important methods of Ayurveda that are disappearing.
Organizing Secretary Dr. Mahesh Indra said that the National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) of the Ministry of AYUSH (Government of India) has approved giving 10 credit points to this workshop.
Observers of the Board of Ethics and Registration of the Ministry of AYUSH are monitoring this program.
Organizing Joint Secretary Dr. B.L. Barala, Joint Secretary Dr. Ramavatar Sharma, Sikar Department Coordinator Dr. Jitendra Kumar Verma, District Coordinator Dr. Hariram Kataria, Dr. Shankarlal Sharma, Dr. Ramesh Kasva and more than 40 members of the organizing committee are cooperating in the successful organization of this historic workshop.
Author: Sarjit Singh







