

दुख:द खबर: श्री राजपूत करणी सेना के प्रधान संस्थापक कालवी का देर रात निधन, पढ़ें एक संघर्षशील व्यक्तित्व का परिचय….
नागौर/बीकानेर, @MaruSangram। करणी सेना के प्रधान संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी का सोमवार मध्यरात्रि 1.15 बजे देवलोक गमन हो गया है।
करती सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी (Lokendra Singh Kalvi) का देर रात हार्ट अटैक (Heart Attack) आने की वजह से निधन हो गया। जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) के डॉक्टर्स ने देर रात इसकी पुष्टि की
अंतिम दर्शन व यात्रा – आज दोपहर 2.15 बजे (14 मार्च 2023) पैतृक गांव – ठि- कालवी, जिला – नागौर में रखी गयी है।
श्री कालवी का जीवन परिचय:
लोकेन्द्र सिंह जी कालवी का जन्म 8 अगस्त 1955 को राजस्थान के नागौर जिले के कालवी गाँव में हुआ था,
पिता जी का नाम कल्याण सिंह कालवी था। इनके पिता युगपुरुष कल्याण सिंह कालवी देश में किसी परिचय के मोहताज नही है, पूरा समाज आज उनको पूजता है, पूज्य कालवी साहब चंद्रशेखर सरकार में केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री रहे थे।
वो राजस्थान के पहले व्यक्ति थे जिनको केन्द्र की कैबिनेट में जगह मिली, 1991 में मात्र 58 वर्ष की आयु में ईश्वर ने हमसे उन्हें छीन लिया। लोकेन्द्र सिंह जी कालवी जो कि उनके इकलौते पुत्र है उनको स्वर्गीय कालवी साहब की पगड़ी बंधी। 1992 से लेकर आज तक उन्होंने अपने पिताजी की खाकी पगड़ी और वेशभूषा और आचरण को जीवन मे अपना लिया। 1993 में पहली बार लोकेन्द्र सिंह जी कालवी ने राजपूत आरक्षण की बात उठाई थी।
लोकेन्द्र सिंह कालवी भाजपा की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य थे।
राजस्थान में मारवाड़ में विधानसभा चुनाव की टिकट वितरण समिति के प्रमुख थे।
कालवी साहब ने भाजपा के टिकट पर 1998 में अपने पिताजी की परंपरागत सीट बाड़मेर-जैसलमेर से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन भितरघात की वजह से हार गये।
1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने राजस्थान के जाटों को ओ.बी.सी में आरक्षण दे दिया। राजस्थान में जाट संख्या में राजपूतों से ज्यादा है और संपन्न भी है इससे आहत होकर कालवी साहब ने भाजपा में रहते हुये इसका पुरजोर विरोध किया और भाजपा से इस्तीफा दे दिया।
और श्री अटल के विरोध में खड़े हो गये। अटल जी को प्रधानमंत्री रहते हुये भी कालवी साहब की अगुवाई में राजपूतों के भारी विरोध की वजह से सिर्फ 2 मिनिट में ही सीकर में भाषण खत्म करके जाना पड़ा।
राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया, भैरों सिंह शेखावत समेत सब भाजपा के राजपूत नेताओं ने कालवी साहब को मनाने की कोशिश की, श्री कालवी नहीं माने, जबकि कुछ दिन पूर्व ही पोकरण के परमाणु विस्फोट में भैरोंसिंह जी शेखावत, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मंच संचालन का जिम्मा कालवी साहब संभाल रहे थे। लेकिन समाज के लिये एक मिनट में राजनैतिक परित्याग कर दिया, राजपूत, ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के आरक्षण के लिये देवी सिंह भाटी के साथ सामाजिक न्याय मंच बनाया।
2003 का विधानसभा चुनाव भी सामाजिक न्याय मंच के बैनर पर लड़ा। लेकिन कट्टर राजपूत छवि होने की वजह से ज्यादा सफलता नहीं मिली, 2003 में राजस्थान में भाजपा की सरकार बनी।
2004 में देवी सिंह भाटी के पुत्र पूर्व सांसद महेन्द्र सिंह भाटी एक सड़क दुर्घटना में काल का ग्रास बन गये। इससे पहले की दुर्घटना में देवी सिंह के एक पुत्र और धर्मपत्नी का स्वर्गवास हो गया था।
देवी सिंह भाटी इस घटना से बहुत ज्यादा टूट गये। 2 वर्ष तक कालवी जी और देवी सिंह भाटी सामाजिक कार्यक्रम से दूर रहें।
जून 2006 में सामाजिक न्याय मंच के विधायक देवी सिंह भाटी भाजपा में शामिल हो गये और कालवी साहब ने समाज सेवा की राह चुन ली।
23 सितम्बर 2006 को राजपूत समाज के 11 मुददों को लेकर श्री राजपूत करणी सेना का गठन किया।
करणी सेना ने समाज के हर गरीब की लड़ाई लड़ी। इतिहास के विखंडन पर सड़कों पर लड़ाई लड़ी। आरक्षण के लिये आज तक संघर्ष जारी है।
आरक्षण के लिये श्री राजपूत करणी सेना ने 2006 से लगातर हर सरकार के सामने सामान्य वर्ग और राजपूत समाज के आरक्षण के लिये बहुत बड़े आंदोलन किये।
Sad news: Kalvi, the main founder of Shri Rajput Karni Sena, passed away late night, read the introduction of a struggling personality….
Author: Jitu Kumar







